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(1)Specific role of Professor Amartya Sen's economic thought in the current economic crisis in India भारतमवतमानआ थकसंकटम ोफेसरअम यसेनकेआ थक वचार क व श टभू मका Dr

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(1)

Specific role of Professor Amartya Sen's economic thought in the current economic crisis in India भारतमवतमानआ थकसंकटम ोफेसरअम यसेनकेआ थक वचार व श टभू मका

Dr. Shaiphali Jain

Assistant Professor (Economics) in Shri Prem Prakash Memorial College of Education (Teerthanker Mahaveer University), Moradabad, Uttar Pradesh, India.

Email: [email protected]

Abstract: The global recession that started in 2008 is still hitting western countries. Their economic growth rate has cooled down. The reasons and its remedies are being discussed at Oxford University Business School. In the debate about the nature of the economy, Amartya Sen said that western economies should learn from India and China.

According to Dr. Sen, India and China are opening markets safely. New Delhi and Beijing have new ideas and they are also being implemented in a phased manner. According to the Nobel Prize winning economist, western countries need to do the same. According to Dr. Sen, India and China were also hit by economic recession. The economic growth rate of both countries was somewhat slow for two years, but after that both these countries got out of the rapid recession and now are also supporting the economies of other countries. According to experts, there are very few ways to avoid the risk of recession in the economies of western countries. All the money has been dumped in the market and there are many areas which have the power to sink the market. Martin Wolff of the financial newspaper, the Financial Times, and Robert Vaid, a professor at the London School of Economics, also believe the same.

[Jain, S. Specific role of Professor Amartya Sen's economic thought in the current economic crisis in India.

Academ Arena 2020;12(11):53-58]. ISSN 1553-992X (print); ISSN 2158-771X (online).

http://www.sciencepub.net/academia. 7. doi:10.7537/marsaaj121120.07.

Abstract: सारांश: 2008 सेशु हुई व व यापीमंद क मारअबभीपि चमीदेश परपड़रह है. उनक आ थक वकास दर ठंडी पड़ी है. ऑ सफोड यू नव सट के बजनेस कूल मइसके कारण और इससे नकलने के उपाय पर चचाहो रह है | अथ यव थाके व पकोलेकर छड़ीबहसमअम यसेननेकहा कपि चमीअथ यव थाओंकोभारतऔरचीनसेसीख लेनीचा हए | डॉ टरसेनकेमुता बकभारतऔरचीनबाजार कोसुर तढंगसेखोलरहेह. नई द ल औरबीिजंगकेपास नए वचार ह और उ ह चरणब तर के से अमल म भी लाया जा रहा है. नोबेल पुर कार वजेता अथशा ी के मुता बक पि चमीदेश कोभीऐसाह करनेक ज रतहै | डॉ टरसेनकेमुता बकभारतऔरचीनपरभीआ थकमंद क मारपड़ी. दोन देश क आ थक वकासदरदोसालतककुछधीमीरह ले कनउसकेबादयहदोन देशतेजीसेमंद सेबाहर नकलेऔर अबअ यदेश क अथ यव थाओंकोभीसहारादेरहेह | जानकार केमुता बकपि चमीदेश क अथ यव थाओंममंद के

जो खमसे बचनेकेउपायबहुतकमह. सारापैसाबाजार मझ काजाचुकाहैऔरऐसे कई े ह जो बाजारकोडुबोनेक ताकतरखतेह. आ थकजगतके द गजअखबारफाइन शयलटाइ सकेमा टनवो फऔरलंदन कूलऑफइकोनॉ म स के ोफेसररॉबटवैडभीयह मानतेह.

Keywords: (कुंजीश द) अम यसेन, आ थक, सामािजक वचार

Introduction ( तावना):

अथ यव थाका भारतीय व प या है या या हो

सकताहै? अथनी तक तेज़ीसेबदलतीभारतक वतमान प रि थ तय मभारतको याकरनाचा हएऔर यानह ं करना चा हए? उदार करण और व वीकरण के आज के

माहौलम वदेशी योजनाओं का अनुकरण करनेके थान पर या हम इनसे भी अ छ कुछ योजनाएं तुत कर सकते है? ऐसे सभी न के उ तर स अथनी त- वचारक भरत झुनझुनवाला ने इस पु तक म दए ह।

(2)

बोधपूण ट प णय तथा आँकड़ से भरपूर एक क ठन वषयक यहएकरोचकपु तकहै।

ो. अम य सेन को नोबेल पुर कार ा त होने के

प चात उनक आ थक थापनाओं पर जो यापक चचा

आर भहुई, यहपु तकउनक भीभारतीय ि टसेसमी ा तुत करती है। साथ ह आ थक नी त संबंधी महा मा

गांधीके वचार परभीलेखकने अपनामत य त कया

है।भरत झुनझुनवालाने व ान म नातकबनने के बाद यू नव सट ऑफ लो रडा से कृ ष अथशा म डॉ टरेट क तथाबंगलौर केइं डयनइ ट यूट ऑफमैनेजमटम अ यापनकाय कया।भारतके वकास तथाअथशा म च रखने वाले सभी पाठक तथा इन वषय के छा - अ यापक के लएयहपु तकअ य तउपयोगीहै।

साधारण ेणी केमनु य कोकेवलरोट, कपड़ा और मकान क च ता रहती है। म यम ेणी के मनु य को

अ त र त सुख-साधन को जुटाने क च ता रहती है।

उ तम ेणी केमनु य को अपनी धनी ि थ त को बनाए रखने एवं और आगे बढ़ने क च ता रहती है। सरकार,

नयम, कानून, थ व शा मु य प से म यम

ेणीवाल के लएहोतेहऔरगौण पसेउ तम ेणीवाल के लए है। साधारण ेणीवाल को सरकारा द कसी भी

चीज से कोई मतलब नह ं रहता। इस लए इस संसार म साधारण ेणी का शोषण म यम ेणी का शोषण उ तम

ेणी वाले करते आए ह, करते ह और करते रहगे। इसी

शोषणकेकारणहर यि तअपनेकोवं चतमहसूसकरता

है। वकासके लएआव यकहै कहर यि तइस ‘वंचना

क भावना’ को यागे और अपनेसेउ तम ेणी वाल क बराबर करनेका यासकरे।

इस पु तक केलेखक ने अवचेतनइ छाओंक पू त क बात क है। वा तव म अवचेतन इ छाओं को देखना

आसाननह ंहै। फरभीयहकहाजासकताहै कद र क अवचेतनइ छाओंकोसामािजकस मोहनसे मटायानह ं जासकता, केवलकुछसमयके लएदबायाजासकताहै।

ये इ छाएँ इतनी बल होती ह क बार-बार कट ह गी।

अत: नई-नईइ छाओंकोपैदाकरनेक अपे ाअवचेतनम न हतइ छाओंकोपहचाननेक व धकोअपनाकरउसी

इ छापू तमलगजानाचा हए।

व तुत: इस संसार के सम त यवहार म सवाल यव थाकाहै।अत: यह वचारकरनाहै क कस यवहार यव थाकोकौनस भालेऔरकौनउसका नय णकरे।

येक यव था केकता एवं नयंता कासह ताममेलहो

जाए तो मनु य सुखी हो सकता है। इ तहास म सरकार अथवाराजाजब-जब वयं यव थाक कताहुईहैतब-तब समाजमअ यव थाहुईहै।अत: सरकारकोसदा नयं क ह बनेरहनाचा हए, कसीभी कार (जैसे श ा, वा य बजल, पानी, सड़क, शोधकाय आ द) का यापार नह ं करनाचा हए।अ पतुउनपर नयं णबनाएरखनाचा हए।

सावज नक सु वधाओं क उपलि ध सरकार नजी े वाराअपने नयं णमकरासकतीहै।

लेखक नेबेरोज़गार सम याकाजोहलबतायाहैवह अ यु तम है।काय ह उपल धता से वा भमान से यु त सुखक ाि तअव यहोगी।इस यव थासेसमाजमजो

असमानताअ नवाय पसेहैउसको वीकारकरतेहुएभी

सामािजक यायसंभवहै।इस यव थाम येक यि त को जो भ न-भ न मताएँ मल ह (जैसे पयावरण, स पि त, लंग, मान सक व शार रक मता) उसी का

वकासकरनेके त ो सा हतकरनाचा हए।

देश का पछड़ापन, सामािजक अ याय, वतरण म वफलता आ द का कारण है वाथ धान उपभोगवाद।

अना दकालसेसमाजमअसमानतारह है, फरभीसभी

सुखीथे।कारणयहथा कसभीएक-दूसरेका यालरखते

थे।असमानताकोछुआछूत, सा दा यकताआ दक सं ा देकरअनथहुआहै। जबतकइनकुर तय को मटायान जाएगातबतकसामािजकसुख, शाि तएवंसमृ असंभव है।

भारत के इ तहास के उ जवल समय पर ि ट डालकर वचारकरतेहतोलगताहै क कसीभी कारके

वदेशी नवेश (सं थागतव य ) कोकभीअवसर नह ं दयागयाथा।क चेमाल (संसाधन) का नयातभीदेशके

हतमनह ंहै।अत: वतमानमदेशक आ थकि थ तको

सुधारनेके लए क चे मालका नयात एवं वदेशी नवेश पर पूण प से तब ध लगाकर केवल सी मत मा ा म उ पा दतमाल के वदेशी यापारको बढ़ावा देना चा हए।

ले कनसाथ-साथहर े मआ म नभरता क ओरबढ़ने

(3)

के लए घरेलू उ योग को भी ो साहन देना होगा ता क अ तरा यबाजारकेउलट-फेरसेउ प नकु भावसेदेश पी ड़तनहो।

मक के आवागमन के साथ-साथ मु ा क प रवतनीयता अ छ है। सभी मु ाओं को उ चत थान

ा तहोनाचा हए।य दहमकेवलडालरपर नभररहगेतो

नि चत है क अमे रका को आ थक ि थ त लुढ़कते ह व व म आ थक संकट उ प न हो जाएगा। एक रा क तानाशाह भीकबतकबनीरहेगी? व वक सु यव थाके

बनेअनेकसंगठन- संयु तरा संघ, ीनपीस, यू नसेफ, नेटो, अंकटाड, व व बक, व व यापार संघठन, ड लू.एच.ओ. इ या द- भी वक सत देश के जेबी संघटन बनकररहगएहै।इससम यासे नपटनेकाएकह उपाय है क वकासशील देश भ न-भ न माल उ पादक संघ- जैसेओपेक-कागठनकरता कवे वक सतदेश परअपना

दबावडालसक।

आ थक वकाससेवं चततबक कोहुआबहुतकमफायदा: अम यसेन:

नोबेल पुर कार से स मा नत अथशा ीअम य सेननेदेशम कफायती वा यसु वधाएंमुहैयाकरानेम नाकामयाबीके पीछे राजनी तकइ छाशि त क कमीको

िज मेवार बताया। टाटा मेमो रयल लै टनम जू बल से ल ेशंज म 'सभी के लए वा य सु वधा- य और कैसे' वषयपरबोलतेहुएसेनने वा यसेवाओंकेबढ़ते

नजीकरणक आलोचनाक औरकहा कगर ब कादोहन तुरंत कना चा हए। अम य सेन ने कहा क आ थक वकासक र तारकेअनुकूल समाज कावं चत वगआगे

नह ं बढ़ पाया है। सेन ने कहा कनोटबंद एक दशाह न मसाइल थी िजसे सरकार ने लोकतां क परंपराओं के

नवहनके बगैर फायर कयाथा। उ ह ने कहा, 'कई तरह क मुि कल और परेशा नय क खबरआ ... यहपता ह नह ं चल पाया क मसाइल कहां जाकर गर ।' वा य सु वधाओं क बात करते हुए सेन ने कहा, 'भारत आ चयजनक पसे बहुतछोटा ह सा जीडीपीका 1.3%

ह वा य सु वधाओं पर खच करहता है जब क चीन 3 तशत।'

नोटबंद नरंकुशफैसला: अथशा ीअम यसेन

उ ह ने कहा कआ थक वकाससे पैदा हुई संपि त का बड़े पैमाने पर असमान बंटवारा हुआ। सेन ने कहा

क वा य सु वधाक प रभाषाम पोषण, व छताऔर सामािजक समानता जैसे सामािजक नधारक को भी

शा मल कयाजानाचा हए।हावडयू नव सट मअथशा

और दशन के फेसर सेन ने कहा क भारत म वा य सेवाओंके नजीकंप नय क भागीदार बहुत यादाहैऔर यहऔसत वक सतदेश केमुकाबलेभीआगे है। फरभी

गुणव ताक सम याहै।

सेननेकहा कनेपालऔरबां लादेशजैसेबहुतकम त यि त आयवालेदेश नेकुछ सामािजकपैमान पर भारत को पछाड़ दया है। उ ह ने कहा, 'कुछ नि चत वा य मापदंड पर भारत सफ पा क तानसे आगे है।' सेनकेमुता बक, वा यकेमामलेमभारतके पछड़ेपन काएक कारणवं चततबक कोआ थक वकासकाउ चत लाभनह ं मलपानाभीहै।उ ह नेकहा करा यसुर ा बीमायोजनाजैसीयोजनाओंकेज रए नजीअ पताल को

सि सडीदेनेकाअनै तककायभी कनाचा हए।

फेसरअम यसेननेकहा कआ चयजनकतौरपर साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान कसी भी बड़े

राजनी तकदलकेमै नफे टोजम वा यसु वधाओंपर कुछ नह ं कहा गया। उ ह ने मी डया पर इस वषय पर वचार-वमश नह ं करने का आरोप लगाया और कहा क साल 2012 मउनक ह ट मक ओरसे कएगए व लेषण म सामने आया क 1% से भी कम संपादक य लेख म

वा यसेजुड़ीखबर कािज था।

ोफेसरअम यसेनकेआ थक वचार:

Amartya Sen का मुख वषय अथशा था और

इसके तउनक वशेष चथी।अम यकुमार एकऐसी

अथ यव थाचाहतेथेिजसकेआ थकलाभकाकुछ ह सा

गर ब को भी मले। अम य कुमार का झुकाव वामपंथी

राजनी तक ओरहोगया।

सन 1943 मबंगालमजोअकालपड़ाथा, उसअकाल म 25 लाखसेभीअ धकलोगमौतकेमुंहमसमागएथे।

उस कल के पड़ने क एक वजह यह भी थी क अं ेजी

सरकारक वतरण णाल कमजोरथी। उस समय व व

(4)

के बहुत से अथशा ी तरह-तरह क आ थक नी तय को

खोजरहेथे।

उनका उ े य वक सत देश को लाभ पहुंचाना था।

उनके अलावा और भी ऐसे बहुत से अथशा ी थे, जो

वकासशील देश के यापा रय क अथ यव था को

उछालनेमलगेथे।अम यकुमारनेऐसेठोसउपायखोज नकाले, िजनके दारा मनु य क द र ता और गर बी से

उसेछुटकारा दलायाजासकताथा।

उ ह ने आगे चलकर व व अथ यव था क सभी

अ छाइय और बुराइय को देखा। इस आधार पर उ ह ने

यह न कष नकाला था। व व म अरब ऐसे लोग ह,

िजनकाजीवनदुख-द र तासे घराहै।भारतमऐसेलोग क सं या अ धक है। इ तहास इस बात का गवाह है क बाहर से आए वदेशी शासक और वदेशी शासक ने भी

आमआदमीक कमरतोड़कररख द है।

आ थकमजबूर उनकेकंध परबोझक तरहलद हुई है। इस बोझ को ढोते-ढोते न जाने कतनी पी ढयां

बीत चुक हऔरआगेनजाने कतनीपी ढयांइसकेनीचे

दबनेको ववशथीं। Amartya Sen नेसन 1953 म े सडसी

कॉलेजसेअथशा म नातकक ड ी ा तक । उसके बाद वे उ च श ा के लए इं लड गए। वहां

क ज व व व यालयके नट कॉलेज मउ ह ने वेश लया। यहां उ ह मखाइल नक सन, चा स फ स टन, लाल जयवधने और महबूब अल हक जैसे साथी मले।

उनम दो गुट बन गए थे, नट कॉलेज म मॉ सवाद मा रस डाब, उदारवाद डे नस रॉबटसन और महान अथशा ी पयरोसाफाअपनीसेवाएंदेरहेथे।

वेतीन महान यि तअम यकुमारके लएवरदान सा बत हुए। उ ह ं क रह पर चलकर अम य कुमार ने

अथशा क बार कय काबड़ीगहराईसेअ ययन कया।

उ ह ने व वभर क अथ यव थाओं का अ ययन कया।

उ ह नेशोधके लए ‘डी वाइसऑफटेि न स’ कोअपना

वषयचुना।

यह वषय समाजवाद अथ यव था से संबं धत था।

मॉर स डाब तथा एक अ य ोफेसर जॉन रॉ ब सन ने

अम य कुमार के वषय के त अपनी खुशी जा हर क औरउ हसहयोगदेनेकावचनभी दया।अम यकुमारने

उस वषय पर अथक मेहनत करके सभी ोफेसर को

आ चयमडाल दया।

एक वष के भीतर ह उनका शोध काय बहुत आगे

नकलगया।अत: वेकॉलेजसेलंबीछु ीलेकरभारतचले

आए।यहां ीए.के. दासगु ताक देख-रेखमउ ह नेअपने

शोध काय को आगे बढ़ाया। वे भी गर ब क आ थक आजाद के बल समथक थे और अम य कुमार जैसा

मेधावीशोधकतापाकरखुशीसेझूमउठेथे।

सन 1956 म अम य कुमार कोजाधवपुर

व व व यालयमअथशा का व ताचुनागया।बादम उनक असाधारण अथशा क मता को देखकर उ ह अथशा वभाग का अ य पद भी मल गया। अम य कुमार नधा रत समयसेपहले ह अपना शोधपूराकरके

इं लड चले गए। अम य कुमार ने अपने शोध वषय क पृ ठभू म को मजबूत बनाने के लए दशक शा और तकशा का अ ययन कया। दशन शा के त भी

उनक गहर चथी।

सन 1963 म अम य कुमार का द ल आना हुआ।

यहां उ ह द ल कुल ऑफ इकोनॉ म स और द ल व व व यालय म अपनी सेवाएं देने का मौका मला।

द ल कूल ऑफ इकोनॉ म स के छा क च

‘सामािजक अ भ च’ वषय के त अ धक थी। यह वषय अम य कुमारका भीएक मुख वषयथा। इसका

संबंधगर बी, बेरोजगार, असमानताऔरआ थकसंकटसे

था।

उसकेसाथह वेएकपू तकक तैयार मजुटेहुएथे।

उस पू तक का नाम ‘कलेि टव वाइस ए ड सोशल वेलफेयर’ है। इसका काशनसन 1970 म हुआ था। इस पू तकम ‘सामािजक अ भ च’ के व भ नपहलुओं पर काश डाला गया है। अम य कुमार को जब भारत म जाधवपुर व व व यालय के अथशा वभाग का हेड बनाया गया था, उसी दौरानउ ह ने नवनीता देवकेसाथ ववाहरचायाथा।दोन मवैचा रकमतभेदउ प नहोगए।

अम यकुमारकभीभारतमरहतेतोकभीइं लडजातेथे।

भारतसेइं लडजानेकेबादवेहावड व व व यालय मअ यापनकाय करनेलगे। पाट टाइम म उनका लेखन काय भीचलता रहा। इं लडम रहकर वे अपनी प नी क भावनाओं क क नह ं कर सके। अंत म दोन म इतनी

(5)

कटुताहोगई कउनके बचतलाकहोगया।नवनीतकेदो

ब चेह – ‘बेट कानामअंतरा (Amartya Sen daughter) है

औरबेटेकानंदन’।

सन 1971 म वे एक अं ेज लड़क ईवा कोल नी के

संपक म आए, अम य कुमार से उनके वचार मलते – जुलते थे। ईवा के वचार और सामािजक भावनाओं से

भा वत होकर अम य कुमार ने उनके साथ ववाह कर लया। गर ब क आ थक आजाद के लए व भ न अथ यव थाओं क खोज करना ह अम य कुमार का

मशन था। ले कन ईवा आजीवन उनका साथ न नभा

सक ं। ईवा ने एक पु ी इं दरानी और एक पु कबीर को

ज म दया। उसके बाद उनका कसर क बीमार से सन 1985 म नधनहुआ।

बाद अम य कुमार अपने ब च को लेकर अमे रका

गए। वे ‘यू नव सट ऑफ टै सास, हावड, टेनफोड और

ंसटन’ जैसे कई व व व यालय को अपनी सेवाएं देने

लगे।अम यकुमारअपनेब चपर वशेष यानरखतेथे।

अम य कुमार अमे रका म रहकर भी इं लड के कई व व व यालय और सं थान से जुड़ेरहे।जब उ ह कोई मानवतावाद अथशा ीकहताहैतोउ हबहुतखुशीहोती

है।

अम यकुमारनेअथशा परलगभग 215 शोधलेख तैयार कए।उ ह नेअथशा केअपनेशोधपर 24 पु तक भी तैयार क ं। वे पु तक व वभर म बहुत लोक य हु । समाजवादके े मउठाएगएउनकेठोसक़दम का व व केअथशा य नेजोरदार वागत कयाथा।

अम य कुमार देश-वदेश के समाचार प और प काओं म अपने लेख भी लखते रहे। सन 1982 म

वाइस वेलफेयर मेजरमटए ड रसोसज’ नामक उनक एक पु तक का शत हुई। उ ह ने भारत म रह रहे ी- पु ष क काय मताऔर लंग केआधार परआ थक व ् औदयो गक े म कए जाने वाले भेद-भाव पर कई आंकड़ काअ ययनभी कयाथा।गर बीऔरअकाल पर कयागयाअम यकुमारकाआ थक व लेषणअंतरा य तरपरखूबसहारागया। सन 1998 मउनकानामनोबेल पुर कारके लएचुनागया।

अम यकुमारकोजबइसक सूचना मल तोउ ह ने

अपनीमांकेपासफोन कया, उनक मांकोयक नह नह ं

हुआ क उनके बेटे को नोबेल पुर कार मलने जा रहा है, देश-वदेशकेसमाचारप मनोबेलपुर कारके लएजब उनकेनामक व धवतघोषणाक गई, तबउनक मां को

यक नहुआ।

अम यकुमारने ‘नोबेलपुर कार’ म मल धनरा श सेएक टबनायाऔरउसधनरा शकाउपयोगभारतके

गर ब व या थय को वदेश म श ा ा तकरनेके लए करनेपरबल दया।नोबेलपुर कारम मल पांचकरोड़क धनरा शकोअम यकुमारनेअपने यि तगतउपयोगम

बलकुलनह ंलगाया।इसके लएदेश-वदेशमउनकेनेक वचार क खूबसराहनाक गई।

अम य कुमार को क याणकार अथ यव था का

जनककहा जाता है और Best Economist India। उ ह ने

लोकक याणकार अथ यव थाका खाका व वकेसम तुतकर दयाहै।अम यकुमारपहलेऐसेअथशा ीह,

िजनका यानगर ब कोगर बीसेमु तकरकेपरगयाहै।

उनकामाननाहैक भारतमगर बीकामु यकारण श ा काअभावऔरसाधनह नताहै।

उ हअपनेभा यकोकोसनेकेबजायकमकरने पर वशेष यान देनाचा हए।अम य कुमारकामाननाहै क व वमगर बीकामूलकारण श ाका पछड़ापनहै।धन कस कारकमायाजाए, इसका ानभी हम श ासेह होताहै। श ासेअ ान पीअंधकारको मटायाजाताहै।

श त यि त अंध व वास के च कर म पड़करधम के

नामपरकभीगुमराहनह ंहोता।

शु आचरण और शु यवहारकरने वाला यि त खुदकोअ ानताकेखतरेसेबचाताहैऔरअपनेआ थक तर कोऊंचाउठानेके लएतरह-तरहकेरा तेतलाशता

है। इस आधार पर सरकार को श ा अ नवाय कर देनी

चा हए।ता क श तसमाजबनेऔरदेशका वकासहो।

लोगउनसेआजभीअथशा परनए-नएशोधक उ मीद करतेह।आशा हैक वेअपनेचाहनेवाल क उ मीद पर खराउतरगे।

Communication Address (प ाचारपता):

Dr. Shaiphali Jain

Assistant Professor (Economics),

Shri Prem Prakash Memorial College of Education (Teerthanker Mahaveer University), Moradabad, Uttar Pradesh, India.

(6)

Email: [email protected]

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11/18/2020

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